Foreign Travellers in Ancient India (NCERT Class 12 History)
प्राचीन भारत में आए विदेशी यात्री, NCERT इतिहास
(NCERT कक्षा 12 इतिहास)
इतिहास केवल राजाओं और युद्धों की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की भी कहानी है जो दूर-दूर देशों से भारत आए और यहाँ की सभ्यता, संस्कृति, शिक्षा, व्यापार, धर्म और समाज को अपनी आँखों से देखकर लिख गए।
विदेशी यात्रियों के यात्रा-वृत्तांत इतिहासकारों के लिए इसलिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे उस समय के भारत की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। कई बार जो बातें भारतीय ग्रंथों में नहीं मिलतीं, वे विदेशी यात्रियों के विवरण से पता चलती हैं।
परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है:
- विदेशी यात्रियों के नाम बताइए।
- फाह्यान और ह्वेनसांग की तुलना कीजिए।
- अल-बिरूनी ने भारत के बारे में क्या लिखा?
- इब्न बतूता के यात्रा-वृत्तांत का महत्व लिखिए।
NCERT कक्षा 12 इतिहास में मुख्य विदेशी यात्री-
| विदेशी यात्री | देश | भारत आगमन | किसके शासनकाल में |
|---|---|---|---|
| मेगस्थनीज | यूनान (ग्रीस) | लगभग 302 ईसा पूर्व | चन्द्रगुप्त मौर्य |
| फाह्यान | चीन | 399–414 ई. | चन्द्रगुप्त द्वितीय |
| ह्वेनसांग | चीन | 629–645 ई. | हर्षवर्धन |
| इत्सिंग | चीन | 671–695 ई. | हर्ष के बाद |
| अल-बिरूनी | मध्य एशिया (ख्वारिज्म) | 1017 ई. | महमूद गजनवी |
| मार्को पोलो | वेनिस (इटली) | 13वीं शताब्दी | दक्षिण भारत |
| इब्न बतूता | मोरक्को | 1333 ई. | मुहम्मद बिन तुगलक |
| अब्दुर रज्जाक | फारस | 1443 ई. | विजयनगर |
| निकोलो कॉन्टी | इटली | 15वीं शताब्दी | विजयनगर |
| डोमिंगो पेस | पुर्तगाल | 1520 ई. | कृष्णदेवराय |
| फर्नाओ नूनीज़ | पुर्तगाल | 1535 ई. | विजयनगर |
1. मेगस्थनीज
(इतिहास के अनुसार भारत आने वाला पहला विदेशी यात्री )
मेगस्थनीज कौन थे?
मेगस्थनीज यूनान (ग्रीस) का राजदूत था। उसे सेल्युकस निकेटर ने चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था।
उनके द्वारा लिखित पुस्तक का नाम क्या था ?
इंडिका (Indica)
हालाँकि पूरी पुस्तक आज उपलब्ध नहीं है, लेकिन उसके उद्धरण अन्य लेखकों के माध्यम से मिलते हैं।
मेगस्थनीज़ ने भारत के बारे में क्या लिखा?
- पाटलिपुत्र उस समय दुनिया के सबसे बड़े नगरों में था।
- राजा के पास विशाल सेना थी।
- प्रशासन बहुत व्यवस्थित था।
- कृषि को विशेष महत्व दिया जाता था।
- सिंचाई की अच्छी व्यवस्था थी।
- समाज को विभिन्न वर्गों में बाँटकर बताया (हालाँकि उसका वर्णन पूरी तरह सही नहीं माना जाता)।
- भारत को समृद्ध और व्यवस्थित देश बताया।
इतिहास में मेगस्थनीज़ के विवरणों का महत्व:
मौर्यकाल के प्रशासन और समाज की जानकारी का सबसे महत्वपूर्ण और ईमानदार विदेशी स्रोत।
2. फाह्यान (Faxian)
कौन थे?
फाह्यान चीन के बौद्ध भिक्षु थे।
भारत क्यों आए?
- बौद्ध धर्म का अध्ययन
- बौद्ध ग्रंथों की खोज
- पवित्र बौद्ध स्थलों के दर्शन
- हिन्दू धर्म के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं दी
उन्होंने भारत में क्या देखा?
- गुप्तकाल को शांतिपूर्ण बताया।
- लोग सामान्यतः ईमानदार थे।
- अपराध कम थे।
- सड़कों पर यात्रियों के लिए धर्मशालाएँ थीं।
- गरीबों की सहायता होती थी।
- बौद्ध धर्म अभी भी प्रभावशाली था।
- राजा जनता पर कम कर लगाते थे।
विशेष बात
उन्होंने मुख्य रूप से बौद्ध धर्म पर ध्यान दिया, इसलिए अन्य विषयों पर कम जानकारी दी।
3. ह्वेनसांग (Xuanzang)
कौन थे?
चीन के महान बौद्ध विद्वान।
भारत कब आए?
629 ईस्वी में।
किसके समय?
सम्राट हर्षवर्धन।
प्रसिद्ध पुस्तक
सी-यू-की (Great Tang Records on the Western Regions)
भारत के बारे में क्या लिखा?
शिक्षा
- नालंदा विश्वविद्यालय विश्व प्रसिद्ध था।
- हजारों विद्यार्थी अध्ययन करते थे।
- प्रवेश परीक्षा कठिन थी।
- विदेशों से भी विद्यार्थी आते थे।
समाज
- ब्राह्मणों का सम्मान था।
- वर्ण व्यवस्था प्रचलित थी।
- लोग धार्मिक थे।
अर्थव्यवस्था
- कृषि विकसित थी।
- व्यापार अच्छा था।
- नगर समृद्ध थे।
धर्म
- बौद्ध और हिन्दू दोनों धर्म प्रचलित थे।
- अनेक मंदिर और मठ थे।
प्रशासन
- हर्ष न्यायप्रिय शासक था।
- जनता सुखी थी।
4. इत्सिंग (Yijing)
कौन थे?
चीन के बौद्ध भिक्षु।
भारत क्यों आए?
बौद्ध धर्म का गहन अध्ययन करने।
उन्होंने क्या लिखा?
- नालंदा विश्वविद्यालय की प्रशंसा।
- भारतीय शिक्षा प्रणाली उत्कृष्ट थी।
- संस्कृत सीखने पर विशेष बल।
- बौद्ध भिक्षुओं के जीवन का विस्तृत वर्णन।
5. अल-बिरूनी
कौन थे?
मध्य एशिया के महान विद्वान।
भारत कैसे आए?
महमूद गजनवी के साथ भारत पहुँचे।
प्रसिद्ध पुस्तक
तहकीक-ए-हिंद (Kitab-ul-Hind)
उन्होंने भारत का अध्ययन कैसे किया?
- संस्कृत सीखी।
- भारतीय विद्वानों से चर्चा की।
- भारतीय ग्रंथ पढ़े।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया।
भारत के बारे में क्या लिखा?
समाज
- जाति व्यवस्था का विस्तार से वर्णन।
- समाज में ऊँच-नीच का उल्लेख।
विज्ञान
- गणित और ज्योतिष की प्रशंसा।
- भारतीय वैज्ञानिक ज्ञान को उच्च स्तर का बताया।
धर्म
- हिन्दू धर्म के दर्शन को समझाया।
- भारतीय परंपराओं का सम्मानपूर्वक वर्णन किया।
महत्वपूर्ण तथ्य
उन्होंने केवल सुनी-सुनाई बातें नहीं लिखीं, बल्कि स्वयं अध्ययन करके लिखा।
6. इब्न बतूता
कौन थे?
मोरक्को के प्रसिद्ध यात्री।
भारत कब आए?
1333 ईस्वी।
किस बादशाह के समय?
मुहम्मद बिन तुगलक।
इब्ने बतूता की प्रसिद्ध पुस्तक:-
रिहला (Rihla)
भारत में क्या देखा?
दिल्ली
- विशाल और समृद्ध नगर।
- भीड़भाड़ वाले बाजार।
- विदेशी व्यापार।
प्रशासन
- सुल्तान अत्यंत बुद्धिमान लेकिन कठोर निर्णय लेने वाला।
- शाही डाक व्यवस्था तेज़ थी।
- न्याय व्यवस्था का वर्णन।
समाज
- विभिन्न धर्मों के लोग रहते थे।
- महिलाओं की स्थिति के कुछ पहलुओं का उल्लेख।
- त्योहारों और विवाहों का वर्णन।
व्यापार
- भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा केंद्र था।
- चीन, अरब और अफ्रीका से व्यापार होता था।
7. मार्को पोलो Marco Polo
Who was Marco Polo ?
कौन थे?
इटली के व्यापारी।
उन्होंने भारत में क्या देखा?
- दक्षिण भारत का व्यापार।
- मोती उद्योग।
- मसालों का व्यापार।
- समुद्री व्यापार की उन्नति।
8. निकोलो कॉन्टी
भारत के बारे में
- विजयनगर साम्राज्य की समृद्धि।
- बड़े बाजार।
- सम्पन्न जनता।
- व्यापारिक गतिविधियाँ।
9. अब्दुर रज्जाक समरकंदी
कौन थे अब्दुर रज्जाक ?
फारस के राजदूत।
उन्होंने क्या लिखा?
- विजयनगर को अत्यन्त विशाल नगर बताया।
- राजमहल और मंदिरों की प्रशंसा।
- व्यापार एवं धन-संपत्ति का वर्णन।
- सुव्यवस्थित प्रशासन का उल्लेख

10. डोमिंगो पेस
किसके समय?
कृष्णदेवराय।
क्या लिखा?
- विजयनगर की सेना।
- कृषि।
- सिंचाई।
- बाजार।
- त्योहार।
- राजकीय व्यवस्था।
राजा कृष्णदेव राय (शासनकाल: 1509–1529 ई.) दक्षिण भारत के सबसे महान शासकों में से एक थे। वे Vijayanagara Empire के तुलुव वंश (Tuluva Dynasty) के सबसे प्रसिद्ध राजा थे।
उनका शासन भारत के किन-किन भागों में था?
कृष्णदेव राय के समय विजयनगर साम्राज्य अपने सबसे बड़े विस्तार पर था। उनके राज्य में मुख्य रूप से आज के ये क्षेत्र शामिल थे:
- पूरा कर्नाटक
- आंध्र प्रदेश का अधिकांश भाग
- तेलंगाना का बड़ा भाग
- तमिलनाडु का उत्तरी और मध्य भाग
- केरल का कुछ भाग
- महाराष्ट्र का दक्षिणी भाग
- ओडिशा का दक्षिणी भाग (गजपति शासकों को हराने के बाद)
विजयनगर राज्य की राजधानी का नाम क्या था :-
- हम्पी (Hampi) – वर्तमान कर्नाटक में।
11. फर्नाओ नूनीज़
उन्होंने क्या लिखा?
- विजयनगर का इतिहास।
- राजवंशों का वर्णन।
- युद्ध।
- प्रशासन।
- आर्थिक समृद्धि।
सभी विदेशी यात्रियों की तुलना :
| यात्री | मुख्य उद्देश्य | सबसे महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|---|
| मेगस्थनीज | राजदूत | मौर्य प्रशासन |
| फाह्यान | बौद्ध धर्म | गुप्तकालीन समाज |
| ह्वेनसांग | शिक्षा व धर्म | नालंदा, हर्षकाल |
| इत्सिंग | बौद्ध शिक्षा | संस्कृत व शिक्षा |
| अल-बिरूनी | अध्ययन | भारतीय समाज, विज्ञान |
| इब्न बतूता | यात्रा | दिल्ली सल्तनत |
| मार्को पोलो | व्यापार | दक्षिण भारत |
| अब्दुर रज्जाक | राजदूत | विजयनगर |
| निकोलो कॉन्टी | यात्रा | व्यापार |
| डोमिंगो पेस | यात्रा | कृष्णदेवराय |
| फर्नाओ नूनीज़ | इतिहास | विजयनगर का विस्तृत वर्णन |
| क्रम | विदेशी यात्री (English) | देश | भारत आने का समय | भारत में किसके शासनकाल में आए | प्रसिद्ध पुस्तक / विवरण |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | Megasthenes | Greece | 302–298 BCE | चन्द्रगुप्त मौर्य | Indica |
| 2 | Deimachus | Greece | लगभग 3rd Century BCE | बिन्दुसार | यूनानी दूत |
| 3 | Dionysius | Greece | लगभग 3rd Century BCE | अशोक (या मौर्य काल) | राजदूत |
| 4 | Faxian (Fa-Hien) | China | 399–414 CE | चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) | बौद्ध धर्म का अध्ययन |
| 5 | Xuanzang (Hiuen Tsang) | China | 629–645 CE | हर्षवर्धन | Great Tang Records |
| 6 | Yijing (I-Tsing) | China | 671–695 CE | हर्ष के बाद का काल | बौद्ध शिक्षा एवं नालंदा |
| 7 | Al-Biruni | Khwarazm (Central Asia) | 1017 CE | महमूद गजनवी के आक्रमण के समय | Kitab-ul-Hind (Tahqiq-i-Hind) |
| 8 | Marco Polo | Venice (Italy) | लगभग 1292–1294 CE | दक्षिण भारत (पांड्य राज्य) | यात्रा-वृत्तांत |
| 9 | Ibn Battuta | Morocco | 1333 CE | मुहम्मद बिन तुगलक | Rihla |
| 10 | Niccolò de’ Conti (Nicolo Conti) | Italy | 1420–1421 CE | विजयनगर साम्राज्य | यात्रा-विवरण |
| 11 | Abdur Razzaq | Persia | 1443–1444 CE | देवराय द्वितीय (विजयनगर) | विजयनगर का वर्णन |
| 12 | Afanasy Nikitin | Russia | 1469–1472 CE | बहमनी एवं विजयनगर काल | Voyage Beyond Three Seas |
| 13 | Duarte Barbosa | Portugal | 1500–1518 CE | विजयनगर एवं मालाबार | व्यापार और समाज |
| 14 | Tomé Pires | Portugal | 1511–1515 CE | प्रारम्भिक 16वीं शताब्दी | Suma Oriental |
| 15 | Domingo Paes | Portugal | 1520–1522 CE | कृष्णदेवराय | विजयनगर का विस्तृत वर्णन |
| 16 | Fernao Nuniz | Portugal | 1535–1537 CE | अच्युतदेवराय | विजयनगर का इतिहास |
| 17 | François Bernier | France | 1656–1668 CE | शाहजहाँ एवं औरंगज़ेब | मुगल भारत का वर्णन |
| 18 | Jean-Baptiste Tavernier | France | 1638–1668 CE (छह यात्राएँ) | शाहजहाँ एवं औरंगज़ेब | व्यापार एवं हीरे |
| 19 | Niccolao Manucci | Italy | 1653 CE | शाहजहाँ एवं औरंगज़ेब | Storia do Mogor |
| 20 | Peter Mundy | England | 1628–1634 CE | शाहजहाँ | व्यापार एवं दैनिक जीवन |
भारत का इतिहास विदेशी यात्रियों की नज़र से :-
परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण विदेशी यात्री (★★★★★)
- Megasthenes – मौर्य काल
- Faxian (Fa-Hien) – गुप्त काल
- Xuanzang (Hiuen Tsang) – हर्षवर्धन काल
- Yijing (I-Tsing) – नालंदा एवं बौद्ध शिक्षा
- Al-Biruni – प्रारम्भिक मध्यकाल
- Ibn Battuta – दिल्ली सल्तनत
- Abdur Razzaq – विजयनगर
- Domingo Paes – कृष्णदेवराय
- Fernao Nuniz – विजयनगर
- François Bernier – मुगल काल
क्या इन यात्रियों की हर बात पूरी तरह सही थी?
नहीं। इतिहासकार इन विवरणों का उपयोग करते समय सावधानी बरतते हैं क्योंकि:
- कई यात्रियों ने वही बातें लिखीं जिनमें उनकी अधिक रुचि थी (जैसे फाह्यान और इत्सिंग ने बौद्ध धर्म पर अधिक लिखा)।
- कुछ ने स्थानीय भाषा पूरी तरह नहीं जानी।
- कुछ विवरण सुनी-सुनाई बातों पर आधारित थे।
- इसलिए इतिहासकार शिलालेखों, सिक्कों, पुरातात्त्विक साक्ष्यों और भारतीय ग्रंथों से भी तुलना करते हैं।
विदेशी यात्रियों के यात्रा-वृत्तांत प्राचीन और मध्यकालीन भारत के इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इनसे हमें प्रशासन, समाज, शिक्षा, धर्म, व्यापार, नगरों, कृषि, विश्वविद्यालयों और लोगों के जीवन के बारे में बहुमूल्य जानकारी मिलती है। साथ ही, इन स्रोतों को हमेशा अन्य ऐतिहासिक प्रमाणों के साथ मिलाकर पढ़ना चाहिए, क्योंकि हर यात्री अपने अनुभव, उद्देश्य और दृष्टिकोण के अनुसार लिखता था।
NCERT कक्षा 12 के दृष्टिकोण से सबसे अधिक महत्वपूर्ण यात्री हैं:
1 – मेगस्थनीज
मेगस्थनीज़ की नज़र से प्राचीन भारत कैसा था?
मेगस्थनीज़ (Megasthenes) यूनान (ग्रीस) का राजदूत था। वह लगभग 302 ईसा पूर्व में सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था। उसने भारत में कई वर्षों तक रहकर यहाँ के समाज, प्रशासन, कृषि, नगर, सेना और लोगों के जीवन को देखा। बाद में उसने अपने अनुभव “Indica” नामक पुस्तक में लिखे।
Q- मेगस्थनीज़ की नज़र से भारत कैसा था?
Ans-
1 – भारत एक समृद्ध और शक्तिशाली देश था
मेगस्थनीज़ ने लिखा कि भारत उस समय संसार के सबसे धनी और विकसित देशों में से एक था।
उसके अनुसार—
- खेतों में भरपूर फसल होती थी।
- नदियाँ जल से भरपूर थीं।
- लोग मेहनती थे।
- भोजन और अनाज की कमी नहीं थी।
परीक्षा की दृष्टि से: उसने भारत को कृषि प्रधान और सम्पन्न देश बताया।
2 – पाटलिपुत्र (आज का पटना) एक विशाल राजधानी थी
मेगस्थनीज़ राजधानी पाटलिपुत्र देखकर बहुत प्रभावित हुआ।
उसने लिखा कि—
- नगर बहुत बड़ा था।
- चौड़ी सड़कें थीं।
- चारों ओर मजबूत लकड़ी की दीवारें थीं।
- नगर के चारों ओर खाई (Moat) बनी थी।
- सुरक्षा के लिए अनेक द्वार और सैकड़ों प्रहरी टावर थे।
उसे लगा कि यह उस समय के विश्व के सबसे बड़े नगरों में से एक था।
चन्द्रगुप्त मौर्य का प्रशासन
मेगस्थनीज़ ने लिखा कि राजा का शासन बहुत व्यवस्थित था।
- अलग-अलग विभाग बने हुए थे।
- अधिकारी अपने-अपने कार्य के लिए जिम्मेदार थे।
- कर (Tax) वसूला जाता था।
- कानून का पालन सख्ती से कराया जाता था।
- राजा जनता की सुरक्षा का ध्यान रखता था।
मौर्य साम्राज्य की विशाल सेना
उसके अनुसार मौर्य साम्राज्य की सेना बहुत बड़ी थी।
उसने लिखा कि सेना में—
- हजारों हाथी
- घुड़सवार
- रथ
- पैदल सैनिक
शामिल थे।
इसी कारण पड़ोसी राज्य मौर्य साम्राज्य से भयभीत रहते थे।
किसान और खेती
मेगस्थनीज़ ने किसानों की बहुत प्रशंसा की।
उसने लिखा—
- किसान युद्ध के समय भी खेती करते थे।
- सेना किसानों को परेशान नहीं करती थी।
- खेती को राज्य का सबसे महत्वपूर्ण कार्य माना जाता था।
- सिंचाई की अच्छी व्यवस्था थी।
लोगों का जीवन
उसने लिखा कि—
- लोग सामान्यतः ईमानदार थे।
- चोरी और अपराध अपेक्षाकृत कम थे।
- लोग सादा जीवन जीते थे।
- परिवार और समाज के नियमों का पालन करते थे।
ध्यान दें: आधुनिक इतिहासकार मानते हैं कि मेगस्थनीज़ ने कुछ बातों को बढ़ा-चढ़ाकर भी लिखा हो सकता है। इसलिए उसके विवरणों की तुलना अन्य स्रोतों से की जाती है।
समाज कैसा था ?
मेगस्थनीज़ ने भारतीय समाज को सात वर्गों में बाँटकर बताया, जैसे—
- दार्शनिक
- किसान
- चरवाहे
- कारीगर
- सैनिक
- अधिकारी
- सलाहकार
मेगस्थनीज़ के अनुसार मौर्यकाल में वर्ण व्यवस्था का उल्लेख नहीं मिलता।
लेकिन भारतीय धर्म ग्रंथों में वर्ण व्यवस्था (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) का उल्लेख मिलता है।
जबकि चन्द्रगुप्त मौर्य के काफी समय बाद अशोक के शिलालेखों में चार वर्णों का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता” ऐतिहासिक रूप से सही है और यह शोध का एक महत्वपूर्ण विषय भी है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना कि “मौर्यकाल में वर्ण व्यवस्था थी ही नहीं।
आज अधिकांश इतिहासकार यह मानते हैं कि:
- वर्ण का विचार मौर्यकाल से पहले मौजूद था।
- लेकिन जन्म-आधारित कठोर जाति व्यवस्था बाद की शताब्दियों में अधिक मजबूत होती गई।
- मौर्यकालीन समाज में स्थानीय समुदाय, जनजातियाँ, पेशेवर समूह और विभिन्न सामाजिक पहचानें भी महत्वपूर्ण थीं।
इसलिए इतिहासकार मानते हैं कि मेगस्थनीज़ ने भारतीय समाज को अपने दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया था।
व्यापार और उद्योग
मेगस्थनीज़ ने लिखा कि—
- भारत का व्यापार बहुत विकसित था।
- कारीगर उत्कृष्ट वस्तुएँ बनाते थे।
- कपड़ा, धातु, हाथीदांत और आभूषण प्रसिद्ध थे।
- नदियों और सड़कों से व्यापार होता था।
2 – फाह्यान
3 – ह्वेनसांग
ह्वेनसांग (Xuanzang / Hiuen Tsang) की भारत यात्रा
NCERT कक्षा 12 इतिहास | बोर्ड एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नोट्स
ह्वेनसांग (Xuanzang) चीन का एक प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु, विद्वान और यात्री था। वह 7वीं शताब्दी में भारत आया और लगभग 16–17 वर्ष भारत में रहा। उसने भारत के धर्म, शिक्षा, समाज, प्रशासन और संस्कृति का विस्तृत वर्णन किया।
उसकी पुस्तक के कारण आज हमें सम्राट हर्षवर्धन (Harshavardhana) के समय के भारत की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | Xuanzang (ह्वेनसांग / ह्वेन त्सांग) |
| देश | चीन |
| भारत आने का समय | 629 ईस्वी |
| भारत से वापसी | 645 ईस्वी |
| भारत में कुल समय | लगभग 16–17 वर्ष |
| भारत के शासक | सम्राट हर्षवर्धन |
| प्रसिद्ध पुस्तक | Great Tang Records on the Western Regions (सी-यू-की / Xi-Yu-Ji) |
| मुख्य उद्देश्य | बौद्ध धर्म का अध्ययन एवं मूल ग्रंथों का संग्रह |
ह्वेनसांग भारत क्यों आया?
उस समय चीन में बौद्ध धर्म फैल चुका था, लेकिन अनेक बौद्ध ग्रंथ अधूरे थे।
ह्वेनसांग चाहता था—
- भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े स्थानों की यात्रा करना।
- नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन करना।
- संस्कृत सीखना।
- बौद्ध धर्म के मूल ग्रंथ चीन ले जाना।
भारत आने का मार्ग
वह चीन से मध्य एशिया होते हुए भारत पहुँचा।
उसने अनेक स्थानों की यात्रा की—
- कश्मीर
- तक्षशिला
- मथुरा
- कन्नौज
- प्रयाग
- वाराणसी
- सारनाथ
- बोधगया
- नालंदा
- कपिलवस्तु
- कुशीनगर
हर्षवर्धन के समय का भारत
जब ह्वेनसांग भारत आया, तब उत्तर भारत पर सम्राट हर्षवर्धन (606–647 ई.) का शासन था।
ह्वेनसांग कई वर्षों तक हर्ष के दरबार में रहा।
उसने लिखा—
- हर्ष विद्वानों का सम्मान करता था।
- वह दान देने में उदार था।
- धार्मिक सहिष्णुता रखता था।
- जनता के कल्याण में रुचि लेता था।
नालंदा विश्वविद्यालय
ह्वेनसांग सबसे अधिक नालंदा विश्वविद्यालय से प्रभावित हुआ।
उसने लिखा—
- हजारों विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करते थे।
- अनेक देशों से छात्र आते थे।
- प्रवेश परीक्षा कठिन थी।
- पुस्तकालय बहुत विशाल था।
- शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी।
भारतीय शिक्षा
उसने लिखा—
- विद्यार्थी वर्षों तक पढ़ाई करते थे।
- गुरु का बहुत सम्मान होता था।
- संस्कृत विद्वानों की प्रमुख भाषा थी।
भारतीय समाज
ह्वेनसांग ने लिखा—
- समाज में विभिन्न सामाजिक वर्ग थे।
- ब्राह्मणों का सम्मान था।
- बौद्ध भिक्षुओं की भी प्रतिष्ठा थी।
- लोग धार्मिक जीवन जीते थे।
उसने विभिन्न धार्मिक परंपराओं के सह-अस्तित्व का भी उल्लेख किया।
धर्म
ह्वेनसांग मुख्य रूप से बौद्ध धर्म का अध्ययन करने आया था।
उसने लिखा—
- भारत में बौद्ध धर्म और हिन्दू धर्म दोनों प्रचलित थे।
- कुछ क्षेत्रों में बौद्ध धर्म बहुत मजबूत था।
- कुछ स्थानों पर उसका प्रभाव कम हो रहा था।
अर्थव्यवस्था
उसने लिखा—
- कृषि अच्छी थी।
- व्यापार विकसित था।
- नगर समृद्ध थे।
- लोग सामान्यतः सम्पन्न थे।
प्रशासन
ह्वेनसांग के अनुसार—
- प्रशासन व्यवस्थित था।
- राजा जनता का ध्यान रखता था।
- अपराधियों को दंड दिया जाता था।
- कर वसूली की व्यवस्था थी।
प्रयाग का महादान
ह्वेनसांग ने लिखा कि सम्राट हर्ष हर पाँच वर्ष में प्रयाग में एक विशाल धार्मिक सभा आयोजित करता था।
उस अवसर पर—
- गरीबों को दान दिया जाता था।
- विद्वानों का सम्मान होता था।
- विभिन्न धर्मों के लोग एकत्र होते थे।
ह्वेनसांग की भारत के बारे में राय
जिन बातों की प्रशंसा की
✔ नालंदा विश्वविद्यालय
✔ भारतीय शिक्षा
✔ संस्कृत भाषा
✔ विद्वानों का ज्ञान
✔ हर्षवर्धन की उदारता
✔ धार्मिक जीवन
जिन बातों का उल्लेख किया
उसने यह भी लिखा—
- कुछ क्षेत्रों में बौद्ध धर्म कमजोर पड़ रहा था।
- समाज में विभिन्न सामाजिक वर्ग थे।
- अलग-अलग क्षेत्रों की भाषा और परंपराएँ भिन्न थीं।
इतिहासकार ह्वेनसांग को क्यों महत्वपूर्ण मानते हैं?
क्योंकि उसने—
- लगभग 16 वर्ष भारत में बिताए।
- अनेक राज्यों की यात्रा की।
- स्वयं देखी हुई बातों को लिखा।
- नालंदा का प्रत्यक्ष वर्णन किया।
- हर्षवर्धन के शासन का विवरण दिया।
इसी कारण उसकी पुस्तक 7वीं शताब्दी के भारत का एक महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1:
ह्वेनसांग भारत क्यों आया था?
उत्तर:
बौद्ध धर्म का अध्ययन करने, संस्कृत सीखने, नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने तथा बौद्ध ग्रंथों को चीन ले जाने के लिए।
प्रश्न 2:
ह्वेनसांग किस राजा के समय भारत आया था?
उत्तर:
सम्राट हर्षवर्धन के समय (629 ईस्वी)।
प्रश्न 3:
ह्वेनसांग ने नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में क्या लिखा?
उत्तर:
उसने लिखा कि नालंदा विश्व का प्रसिद्ध शिक्षा केंद्र था, जहाँ हजारों विद्यार्थी अध्ययन करते थे, प्रवेश कठिन था, विशाल पुस्तकालय था और अनेक देशों से छात्र आते थे।
4 – अल-बिरूनी
कक्षा 12 NCERT इतिहास में अल-बिरूनी और इब्न बतूता दो सबसे महत्वपूर्ण विदेशी यात्रियों में गिने जाते हैं। दोनों ने भारत का विस्तृत वर्णन किया, लेकिन दोनों के भारत आने का उद्देश्य और भारत को देखने का दृष्टिकोण अलग था।

| विषय | अल-बिरूनी | इब्न बतूता |
|---|---|---|
| देश | ख़्वारज़्म (वर्तमान उज्बेकिस्तान/तुर्कमेनिस्तान क्षेत्र) | मोरक्को |
| भारत आने का समय | 1017 ई. | 1333 ई. |
| भारत में किसके समय आए | महमूद गजनवी के आक्रमणों के बाद | मुहम्मद बिन तुगलक |
| उद्देश्य | भारत के ज्ञान, धर्म और विज्ञान का अध्ययन | यात्रा, नौकरी और प्रशासन |
| प्रसिद्ध पुस्तक | किताब-उल-हिन्द (Kitab-ul-Hind) | रिहला (Rihla) |
1. अल-बिरूनी (Al-Biruni)
अल-बिरूनी कौन था?
अल-बिरूनी एक महान वैज्ञानिक, गणितज्ञ, खगोलशास्त्री, इतिहासकार और भाषाविद् था। वह कई भाषाएँ जानता था और भारत आने के बाद उसने संस्कृत भी सीखी।
परीक्षा में याद रखें
नाम: Al-Biruni
भारत आगमन: 1017 ई.
शासनकाल: महमूद गजनवी के आक्रमणों के बाद
प्रसिद्ध पुस्तक:Kitab-ul-Hind
भारत क्यों आया?
महमूद गजनवी के भारत आक्रमणों के बाद अल-बिरूनी भारत पहुँचा।
उसका उद्देश्य था—
- भारत के धर्म को समझना।
- संस्कृत सीखना।
- भारतीय गणित, ज्योतिष और दर्शन का अध्ययन करना।
- भारतीय समाज का वास्तविक वर्णन करना।
उसने भारत के बारे में क्या लिखा?
1. भारतीय विद्वान बहुत ज्ञानवान थे।
उसने लिखा—
- भारतीय गणित बहुत उन्नत था।
- खगोल विज्ञान विकसित था।
- विद्वान तर्कशास्त्र और दर्शन में निपुण थे।
2. संस्कृत भाषा
अल-बिरूनी ने संस्कृत सीखी।
उसने लिखा—
संस्कृत बहुत समृद्ध भाषा है, लेकिन इसे सीखना कठिन है।
3. भारतीय समाज
उसने लिखा—
- समाज में जातियों का प्रभाव था।
- अलग-अलग सामाजिक समूह थे।
- सामाजिक मेल-जोल पर कई प्रतिबंध थे।
यहीं पर अल-बिरूनी ने जाति व्यवस्था की आलोचना भी की।
अलबरूनी का सबसे चर्चित वर्णन – भारतीय समाज कैसे था ?
अल-बिरूनी ने लिखा कि समाज में विभिन्न सामाजिक समूह हैं।
उसने लिखा कि समाज में ऊँच-नीच की भावना दिखाई देती है और अलग-अलग समूहों के बीच मेल-जोल पर भी सामाजिक सीमाएँ हैं।
विभिन्न जातियों में आपसी मेलजोल का आभाव, बाहरी या विदेशी लोगों को भी अच्छी नजर से नहीं देखा जाता या उनको निम्न स्तर का माना जाता है और उनके साथ ज्ञान विज्ञान साझा करने में भी कठिनाई होती है।
भारतीय विद्वान अपने ज्ञान को ही सर्वश्रेष्ठ समझते हैं और वे इसके प्रचार प्रसार पर भी बात नहीं करना चाहते।
उसने यह भी लिखा कि विदेशी लोगों को समाज में आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता।
4. धर्म
उसने हिन्दू धर्म का विस्तार से अध्ययन किया।
उसने लिखा—
- भारतीय लोग धार्मिक हैं।
- अनेक देवी-देवताओं की पूजा होती है।
- पुनर्जन्म (Rebirth) में विश्वास किया जाता है।
5. विज्ञान
अल-बिरूनी भारतीय गणित और खगोल विज्ञान से बहुत प्रभावित हुआ।
उसने आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त जैसे विद्वानों की प्रशंसा की।
6. भारत की आलोचना
उसने लिखा कि—
- भारतीय विद्वान अपने ज्ञान पर गर्व करते हैं।
- वे विदेशियों से कम मेल-जोल रखते हैं।
- कई बार बाहरी विचारों को स्वीकार नहीं करते।
ध्यान दें कि यह उसका व्यक्तिगत अवलोकन था।
अल-बिरूनी ने यह पुस्तक क्यों लिखी?
अल-बिरूनी केवल एक यात्री नहीं था, बल्कि वह एक वैज्ञानिक, गणितज्ञ, खगोलशास्त्री, भूगोलवेत्ता और इतिहासकार था।
उसका उद्देश्य भारत की आलोचना करना नहीं था, बल्कि यह समझना था कि—
- भारतीय कैसे सोचते हैं?
- उनका धर्म क्या है?
- उनकी शिक्षा कैसी है?
- उनका समाज कैसे चलता है?
- उनके विज्ञान और गणित का स्तर क्या है?
इसलिए उसने लगभग 16 वर्ष भारत में रहकर संस्कृत सीखी और अनेक भारतीय ग्रंथों का अध्ययन किया।
अल-बिरूनी का महत्व
आज इतिहासकार उसकी पुस्तक को इसलिए महत्वपूर्ण मानते हैं क्योंकि उसने भारतीय संस्कृति को समझने का प्रयास किया और केवल युद्धों का नहीं, बल्कि समाज, धर्म, विज्ञान और शिक्षा का भी वर्णन किया।
5 – इब्न बतूता

इब्न बतूता (Ibn Battuta)
इब्न बतूता कौन था?
इब्न बतूता मोरक्को का प्रसिद्ध यात्री था।
वह लगभग तीस वर्षों तक दुनिया के अनेक देशों में घूमता रहा।
भारत उसकी सबसे महत्वपूर्ण यात्राओं में से एक थी।
याद रखें
नाम: Ibn Battuta
देश: Morocco
भारत आगमन: 1333 ई.
राजा: मुहम्मद बिन तुगलक
पुस्तक:Rihla
भारत क्यों आया?
भारत उस समय एक समृद्ध और शक्तिशाली देश था।
मुहम्मद बिन तुगलक विद्वानों को सम्मान देता था।
इब्न बतूता दिल्ली आया और उसे दिल्ली का काज़ी (न्यायाधीश) नियुक्त किया गया।
उसने भारत के बारे में क्या लिखा?
1. दिल्ली
उसने लिखा—
- दिल्ली बहुत बड़ा नगर था।
- बाजार अत्यन्त व्यस्त थे।
- व्यापार खूब होता था।
- विदेशी व्यापारी बड़ी संख्या में आते थे।
2. मुहम्मद बिन तुगलक
इब्न बतूता ने लिखा—
- सुल्तान बहुत विद्वान था।
- वह दान देने में उदार था।
- लेकिन उसका स्वभाव अचानक बदल जाता था।
- वह कठोर दंड भी देता था।
3. डाक व्यवस्था
इब्न बतूता भारत की डाक व्यवस्था देखकर बहुत प्रभावित हुआ।
उसने लिखा—
- घुड़सवार संदेशवाहक थे।
- तेज़ संचार व्यवस्था थी।
- समाचार जल्दी पहुँच जाते थे।
4. व्यापार
उसने लिखा—
भारत में व्यापार बहुत विकसित था।
यहाँ से—
- कपास
- रेशम
- मसाले
- चीनी
- कीमती पत्थर
दूसरे देशों में भेजे जाते थे।
5. महिलाएँ
उसने विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के जीवन का भी वर्णन किया।
उसने कई सामाजिक परंपराओं का उल्लेख किया, जो उसके लिए नई थीं।
6. समुद्री व्यापार
इब्न बतूता मलाबार तट तक गया।
उसने लिखा—
- भारत का समुद्री व्यापार बहुत समृद्ध था।
- अरब और चीन के जहाज़ भारत आते थे।
7. यात्राएँ
उसने भारत के अनेक नगरों की यात्रा की।
वह मालाबार, मालदीव और बंगाल तक गया।
इब्न बतूता का महत्व
उसकी पुस्तक Rihla दिल्ली सल्तनत के समय के भारत की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तकों में गिनी जाती है।
दोनों यात्रियों की तुलना
| विषय | अल-बिरूनी | इब्न बतूता |
|---|---|---|
| समय | 1017 ई. | 1333 ई. |
| भारत का शासक | महमूद गजनवी के आक्रमणों का काल | मुहम्मद बिन तुगलक |
| उद्देश्य | ज्ञान प्राप्त करना | यात्रा और नौकरी |
| मुख्य विषय | धर्म, समाज, विज्ञान | प्रशासन, व्यापार, यात्रा |
| पुस्तक | Kitab-ul-Hind | Rihla |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
अल-बिरूनी
प्रश्न: अल-बिरूनी भारत क्यों आया?
उत्तर: भारतीय धर्म, संस्कृत, विज्ञान और संस्कृति का अध्ययन करने
इब्न बतूता
प्रश्न: इब्न बतूता किस शासक के समय भारत आया?
उत्तर: मुहम्मद बिन तुगलक के समय (1333 ई.)।
याद रखने की ट्रिक
अल-बिरूनी = “ज्ञान और भारत का अध्ययन”
- 1017 ई.
- संस्कृत सीखी
- Kitab-ul-Hind
इब्न बतूता = “यात्रा और दिल्ली सल्तनत”
- 1333 ई.
- मुहम्मद बिन तुगलक
- दिल्ली का काज़ी
- Rihla
इन सभी पर चर्चा शीघ्र प्रकाशित की जाएगी !





